19.8.08

तुम्हारी खुशबू के साथ सोने से नशा आ गया

निशानी आपकी ..मुझको कुछ दरकार नही है
मीठा बोसा दे दीजिए.. बस मेहरबानी आपकी.

रूठा-राठी तो अक्सर दोस्ती में होती रहती है
अक्सर दिल टूटते नही है ..तोड़ दिए जाते है.

कही रातो में दिल देकर दिल दुखाया न करो
अगर मिल गया तो कहोगी.. दुखाया न करो.

तुम्हारी खुशबू के साथ सोने से नशा आ गया
जिंदगी का मजा आ गया खैर कोई बात नही.

तू चाहे तो अगर...मै पानी में आग लगा दूँ
जिंदगी दो दिनों की,तो मस्ती क्यो न कर लूँ.

महेंद्र मिश्रा

1 टिप्पणी:

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह क्या बात हे, सीधे ही बोसे पर,
बहुत सुन्दर शेर हे
धन्यवाद