13.9.08

उन्हें अब न जाने दूंगा , मै थाम लूँगा आँचल उनका

इस अदा से न देखो , कि हम मस्त मदहोश हो जाए
इस दिल में न उतरो, कही दिल में आग न लग जाए.

हमसे नजर..मिला न सके वो, तो उन्हें कुछ गम है
कि दिल से दिल का धड़कने का ,सिलसिला शुरू हुआ.

कितनी मुद्दतो के बाद ,,तुम जी भरकर देखने दो मुझे
नजर के सुरूर शामिल है ,पीने न दूंगा अपने जाम से.

उन्हें अब न जाने दूंगा , मै थाम लूँगा आँचल उनका
जिगर के सामने बैठाकर , रोक दूंगा दिल की धड़कन.

तेरा दीवाना , सारी दुनिया कह रही है दिल से मुझे
ये क्या क़यामत है ,कि तू मुझे पहचान नही रही है.

...........

3 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

उन्हें अब न जाने दूंगा , मै थाम लूँगा आँचल उनका
जिगर के सामने बैठाकर , रोक दूंगा दिल की धड़कन
" bhut sunder, dil ko dhadhkatee ek sharahneey soch"
Regards

विवेक सिंह ने कहा…

By the way आपकी उम्र कितनी है ? Don't mind आप एक जवाँ दिल के मालिक हैं .

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन महाराज!!!

:)


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हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

-समीर लाल
http://udantashtari.blogspot.com/