14.6.09

यदि कुछ कर गुजरने का हौसला हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता है उसने अकेले २५ फुट गहरा कुँआ खोद दिया ....

इंसान यदि कुछ भी कर गुजरने का हौसला रखता हो तो वह क्या नहीं कर सकता है इसके उदाहरण कभी कभी देखने को मिल जाते है . गाँवो में भूजल का स्तर गिरता जा रहा है जिसके कारण पेयजल का संकट दिनोदिन गहराता जा रहा है . मध्यप्रदेश में सिवनी जिले के छपारा से चार-पॉँच किलोमीटर दूर खैरी गाँव है . उस गाँव में पानी की भारी किल्लत वहां के निवासियो को झेलना पड़ती है .

गाँव में रामेश्वर राजपूत नाम का एक किसान रहता है . पानी की कमी के चलते उसकी फसले सिंचाई न होने के कारण लगातार तीन चार सालो से फसले सूख जाती थी और उसे और उसके परिवार को पीने के पानी के लिए भरी जद्दोजहद करनी पड़ती थी और इन कारणों से उसे भारी तकलीफों का सामना करना पड़ा .

इन्ही तकलीफों को झेलते झेलते उसे प्रेरणा मिली और एक बहादुर सिपाही की तरह फावडा तसला और कुदाली लेकर उसने खुद अकेले अपने खेत में कुँआ खोदना शुरू कर दिया . करीब छह माहो तक अथक परिश्रम कर २५ फुट गहरा खोद डाला और उस कुंये में पानी की धारा फूट पड़ी . कुंये पानी मिलने से उसके परिवार में खुशहाली की नई लहर दौड़ गई है . उसके खेत सिंचाई से लहलहा गए है और उसे और उसके परिवारजनों को भरपूर पीने का पानी उस कुंये से मिल रहा है .

पानी की विकराल समस्या से संकटग्रस्त उस गाँव के सारे लोग रामेश्वर किसान का हैरत अंग्रेज कारनामा देखकर दांतों तले अपनी अंगुली चबा लेते है . कहने और बताने का तात्पर्य यह है कि अगर व्यक्ति कुछ कर गुजरने का हौसला जज्बा रखता हो तो किसी भी कठिन से कठिन दुरूह कार्य को वह कर सकता है और उस कार्य में सफलता उसे जरुर अर्जित होती है . रामेश्वर किसान के हैरत अंग्रेज कारनामे को देखकर कई लोगो को प्रेरणा मिली है .

दृढ इच्छा संकल्पशक्ति सफलता का सबसे बड़ा सूत्र है .

12 टिप्‍पणियां:

ओम आर्य ने कहा…

ऐसी जानकारियो से हौसला अवश्य मिलती है बहुत बढिया......

अशोक पाण्डेय ने कहा…

उस दृढ़निश्‍चयी किसान के प्रेरणादायी प्रयास के बारे में जानकारी देने के लिए आभार।आभार।

अनिल कान्त : ने कहा…

hausala badhane wali khabar

"अर्श" ने कहा…

dil me jajbaa hoto khud upar waalaa aakar puchhta hai bataa teri rajaa kya hai.........



arsh

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर, सच मै कर्मयोगी के लिये कुछ भी कठिन नही.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बात वही पुरानी ही है मिश्र जी की उद्यमेन ही ..... मुखे मृगा .और ईश्वर भी मेहनत कश का ही साथ देता है .

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

सही है - कुछ भी कर गुजरने के लिये जुनून चाहिये।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

उस ने पूँजी के अभाव को अपने श्रम से धो दिया। वह किसान प्रणम्य है।

P.N. Subramanian ने कहा…

प्रेरणादायक. हमने अपनी नौकरी के दिनों में देखा है की किसान अपनी खेतों में कुंवे खोदने के लिए कर्ज लेते तो हैं परन्तु स्वयं श्रम करते हैं.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

इसे पढ़ कर बिहार के दिवंगत मांझी जी की याद ताज़ा हो आई, जिन्होंने अकेले ही पहाड़ खोद कर रास्ता निकाल दिया था.

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

दृढ़ इच्छा शक्ति से सफलता सम्मुख आ खड़ी होती है । आभार ।

poemsnpuja ने कहा…

vakai...hausla aur dridh nishchay ho to insaan kuch bhi kar sakta hai. is prernadayak prasang ko post karne ke liye shukriya