10.7.09

ओ जानम अब तो गुस्सा छोड़ दो

अब तो हमें अपनी खता कबूल है
ओ जानम अब तो गुस्सा छोड़ दो
अगर आप माने हमसे तुम जानम
आप की कसम मर मायेंगे जानम.

oooooooo

तेरे दिल में है नही वफ़ा का नाम
तुम्हे क्यों किसी से प्यार मिलेगा
जमाने की मोहब्बत ठुकराने वाले
तुझे किसी से दुआ क्या मिलेगी
ooooooooo

11 टिप्‍पणियां:

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

जमाने की मोहब्बत ठुकराने वाले
तुझे किसी से दुआ क्या मिलेगी

बहुत लाजवाब. शुभकामनाएं.

रामराम.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

जमाने की मोहब्बत ठुकराने वाले
तुझे किसी से दुआ क्या मिलेगी...
बहुत खूब.

श्यामल सुमन ने कहा…

अब तो हमें अपनी खता कबूल है - ये आत्मस्वीकृति पसन्द आयी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह वाह महेंदर जी जबाब नही बहुत सुंदर शेर कहे आप ने.
धन्यवाद

तनु श्री ने कहा…

kitna sundr likhte hain aap.

सैयद | Syed ने कहा…

जमाने की मोहब्बत ठुकराने वाले
तुझे किसी से दुआ क्या मिलेगी


वाह वाह मिश्र जी, क्या बात है.

ओम आर्य ने कहा…

बहुत ही सुन्दर लिखते हो भावु

अनिल कान्त : ने कहा…

वाह जी वाह

मथुरा कलौनी ने कहा…

बहुत खूब !!

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

gusse se pehle kahin humein na....

mukesh ने कहा…

सतसैया के दोहरे ज्यो नाविक के तीर
देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर
जी हाँ , आपकी कविताये भी इसी तरह है