दो चार लोग का समूह को गोट गुट कहते हैं . गुटबाजी कहाँ नहीं होती है . परिवार में बिरादरी में राजनीति में मुहल्लों में गली कूचो में नौकरी में व्यापार में हर जगह गुटबाजी बखूबी देखने को मिल सकती हैं . गुटबाजी का चक्कर ब्लागजगत में भी आजकल खूब देखने को मिल रहा हैं और गुटबाजी के चक्कर में कई ब्लॉगर पोस्ट लिखना भूलकर घनचक्कर हो रहे हैं और एक दूसरे की पूंछ खींचने में लगे है . कुछ पुराने गुटबाज नए गुटों को प्रोत्साहित करने के काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं और कुछ घी डाल कर आग लगाने का काम कर रहे हैं . गुटबाजी का मुख्य ध्येय अपनी अपनी अहमियत साबित करना होता हैं और यह सब ब्लागजगत में हो रहा हैं . आखिर इस गुटबाजी से लोगो को क्या हासिल होगा यह मेरी समझ से परे हैं .
हम सभी ब्लागरों का मुख्य उद्देश्य अपनी मातृभाषा हिंदी की सेवा करना हैं . यदि इंटरनेट जगत में सारे विश्व में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करना हैं तो हमें गुटबाजी का परित्याग करना सुनिश्चित करना होगा . यदि हिंदी ब्लागिंग के क्षेत्र में गुटबाजी अधिकाधिक बढ़ती है तो अच्छे कलमकार ब्लागिंग करने में परहेज करेंगे और विश्व के समक्ष हिंदी भाषा की छबि खराब होगी . गुटबाजी के चक्कर में व्यक्ति यहाँ वहां भटक जाता है और अपने मूल उद्देश्य को भूल जाता है .मेरा नव ब्लागरों से पुरजोर निवेदन हैं की वे गुटबाजी की और ध्यान न दें और हिंदी भाषा में सतत लेखन कार्य करें अधिकाधिक पोस्ट लिखें और सारे विश्व में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करने में योगदान दें .
जय हिंद जय हिंदी
महेंद्र मिश्र
जबलपुर.
21 टिप्पणियाँ:
महेन्द्र जी, आपका कथन सत्य है। आज ब्लॉग जगत में गुटबाजी खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। इसे दूर करने के लिए सबको निजी स्वार्थों से उपर उठ कर सोचना होगा।
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कौन हो सकता है चर्चित ब्लॉगर?
पत्नियों को मिले नार्को टेस्ट का अधिकार?
गुटबाजी के चक्कर में कई ब्लॉगर पोस्ट लिखना भूलकर घनचक्कर हो रहे हैं और एक दूसरे की पूंछ खींचने में लगे है।
गुटबाजी की और ध्यान न दें और हिंदी भाषा में सतत लेखन कार्य करें अधिकाधिक पोस्ट लिखें।
बहुत ही उम्दा बात कही है मिसिर जी
राम राम
महेंद्र जी, एकदम सही कहा अपने, पाता नहीं क्या मजा आता है इन कुछ लोगो को ऐसा करने पर ?
ज्ञानदत्त ने लडावो और राज करो के तहत कल बहुत ही घिनौनी हरकत की है. आप इस घिनौनी और ओछी हरकत का पुरजोर विरोध करें. हमारी पोस्ट "ज्ञानदत्त पांडे की घिनौनी और ओछी हरकत भाग - 2" पर आपके सहयोग की अपेक्षा है. कृपया आशीर्वाद प्रदान कर मातृभाषा हिंदी के दुश्मनों को बेनकाब करने में सहयोग करें.
-ढपोरशंख
ज्ञानदत्त ने लडावो और राज करो के तहत कल बहुत ही घिनौनी हरकत की है. आप इस घिनौनी और ओछी हरकत का पुरजोर विरोध करें. हमारी पोस्ट "ज्ञानदत्त पांडे की घिनौनी और ओछी हरकत भाग - 2" पर आपके सहयोग की अपेक्षा है.
कृपया आशीर्वाद प्रदान कर मातृभाषा हिंदी के दुश्मनों को बेनकाब करने में सहयोग करें. एक तीन लाईन के वाक्य मे तीन अंगरेजी के शब्द जबरन घुसडने वाले हिंदी द्रोही है. इस विषय पर बिगुल पर "ज्ञानदत्त और संजयदत्त" का यह आलेख अवश्य पढें.
-ढपोरशंख
हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करना हैं तो हमें गुटबाजी का परित्याग करना सुनिश्चित करना होगा .....
जय हिंद! जय हिंदी !
बहुत से ऐसे ब्लॉगर हैं जो गुटबाजी से दूर रहकर लेखन कर रहे हैं. उनका उत्साहवर्धन होना चाहिए.
"यदि इंटरनेट जगत में सारे विश्व में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करना हैं तो हमें गुटबाजी का परित्याग करना सुनिश्चित करना होगा ."
सौ टके की बात!
बहुत ही उम्दा बात कही है मिसिर जी
भाई हेम पाण्डेय जी,
आपके विचारो से शत प्रतिशत सहमत हूँ ....टीप के लिए आभार
महेंद्र मिश्र
जबलपुर.
आपने बहुत अच्छी बात कही है... समीर जी खुद ही इस सबसे अलग रहने के लिये कह रहे हैं.. ज्ञानदत्त जी की पोस्ट से कुछ लोग आहत हो सकते हैं, लेकिन इस सबको लेकर समर्थकों का ऐसा विकराल रूप... छद्म नाम से टिप्पणी-प्रति टिप्पणी.. कभी कभी मुझे बड़ा दुख होता है यह देखकर. मुझे भी लगता है कि मैं भी इस सब को बंद कर दूं लिखना भी और पढ़ना भी.. लेकिन फिर अपने दिमाग को समझा देता हूं कि मेरे जो विचार हैं, प्रकट कर रहा हूं, यदि अच्छा लगे तो वैसा लिख दीजिये, खराब लगे तो वैसा... नम्बर गेम मुझे समझ में नहीं आता... रैंकिंग के साथ यदि पैसा मिल रहा होता तो न जाने क्या होता.. खैर शान्ति बनी रहे और अभद्र भाषा का प्रयोग न हो तो बढ़िया.. वाद-प्रतिवाद भी समझ में आता है लेकिन कथित समर्थकों की ऐसी भाषा... राम राम..
मस्त रहो जी, हम किसी भी गुट वाजी मै नही है....
कबिरा तेरी झोपडी गल कट्यो के पास,
करेगा सो भरेगा तू क्यो होत उदास
सही बात कही है आपने.
गुट निरपेक्ष भी तो एक गुट ही हुआ शायद
आपने विलकुल सही कहा अपनी हिन्दी भाषा का प्रचार और प्रसार जरूरी है लेकिन ये सब तब तक है जब तक भारत है अत: जो भारत की ही आत्मा पर चोट कर रहे हैं उनकी पूंछ सिर्फ मरोड़नी ही नहीं चाहिए बल्कि तोड़कर फैंक देनी चाहिए अगर राष्ट्रहित में जरूरी हो तो और ताकत हो तो
आपने विलकुल सही कहा अपनी हिन्दी भाषा का प्रचार और प्रसार जरूरी है लेकिन ये सब तब तक है जब तक भारत है अत: जो भारत की ही आत्मा पर चोट कर रहे हैं उनकी पूंछ सिर्फ मरोड़नी ही नहीं चाहिए बल्कि तोड़कर फैंक देनी चाहिए अगर राष्ट्रहित में जरूरी हो तो और ताकत हो तो
sahi kah rahe hain aap..
एक अपील ;)
हिंदी सेवा(राजनीति) करते रहें????????
;)
यदि हिंदी ब्लागिंग के क्षेत्र में गुटबाजी अधिकाधिक बढ़ती है तो अच्छे कलमकार ब्लागिंग करने में परहेज करेंगे और विश्व के समक्ष हिंदी भाषा की छबि खराब होगी. गुटबाजी के चक्कर में व्यक्ति यहाँ वहां भटक जाता है और अपने मूल उद्देश्य को भूल जाता है.
सही है!
महेंद्र जी, यहाँ पर सभी कहेंगे कि "बढ़िया लेख है" लेकिन लेख में कही गई बातों पर अमल कोई नहीं करेगा. यही हमारा दुर्भाग्य है.
जय हिंद, जय हिंदी!
... आप सच कह रहे हैं ...प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!!
ज्ञानदत्त और अनूप की साजिश को बेनकाब करती यह पोस्ट पढिये।
'संभाल अपनी औरत को नहीं तो कह चौके में रह'
वाह बहुत बढ़िया! लाजवाब!
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