दो चार लोग का समूह को गोट गुट कहते हैं . गुटबाजी कहाँ नहीं होती है . परिवार में बिरादरी में राजनीति में मुहल्लों में गली कूचो में नौकरी में व्यापार में हर जगह गुटबाजी बखूबी देखने को मिल सकती हैं . गुटबाजी का चक्कर ब्लागजगत में भी आजकल खूब देखने को मिल रहा हैं और गुटबाजी के चक्कर में कई ब्लॉगर पोस्ट लिखना भूलकर घनचक्कर हो रहे हैं और एक दूसरे की पूंछ खींचने में लगे है . कुछ पुराने गुटबाज नए गुटों को प्रोत्साहित करने के काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं और कुछ घी डाल कर आग लगाने का काम कर रहे हैं . गुटबाजी का मुख्य ध्येय अपनी अपनी अहमियत साबित करना होता हैं और यह सब ब्लागजगत में हो रहा हैं . आखिर इस गुटबाजी से लोगो को क्या हासिल होगा यह मेरी समझ से परे हैं .
हम सभी ब्लागरों का मुख्य उद्देश्य अपनी मातृभाषा हिंदी की सेवा करना हैं . यदि इंटरनेट जगत में सारे विश्व में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करना हैं तो हमें गुटबाजी का परित्याग करना सुनिश्चित करना होगा . यदि हिंदी ब्लागिंग के क्षेत्र में गुटबाजी अधिकाधिक बढ़ती है तो अच्छे कलमकार ब्लागिंग करने में परहेज करेंगे और विश्व के समक्ष हिंदी भाषा की छबि खराब होगी . गुटबाजी के चक्कर में व्यक्ति यहाँ वहां भटक जाता है और अपने मूल उद्देश्य को भूल जाता है .मेरा नव ब्लागरों से पुरजोर निवेदन हैं की वे गुटबाजी की और ध्यान न दें और हिंदी भाषा में सतत लेखन कार्य करें अधिकाधिक पोस्ट लिखें और सारे विश्व में हिंदी भाषा का अधिकाधिक प्रचार प्रसार करने में योगदान दें .
जय हिंद जय हिंदी
महेंद्र मिश्र
जबलपुर.