27.8.08

एक आशियाना सजाने में हस्ती मिट गई

वह खुदा के दर से ही जो कुछ भी मिलेगा
हम हाथ नही फैलाते ज़माने भर के आगे.

सुहानी रात का मंजर और तुम्हारी यादे
आंसू बहाते है पर करवटे नही बदलते है.

बिगड़ी हुई तकदीरे भी कभी बदल जाती है
हम लाया नही करते है शिकवा जुबां पर.

मिलना नसीब था या बिछड़ना नसीब है
पास आना नसीब था या दूर जाना नसीब है.

तुम ही इस सवाल का जबाब बताते जाओ
फ़िर हँसाना नसीब था या सिसकना नसीब है.

एक आशियाना सजाने में हस्ती मिट गई
हाले गम सुनाने में एक उम्र गुजर गई.

जिन्हें अपना बनने में कई बरस लग गए
देखिये एक ही झटके में वे बेगाने हो गए.

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9 टिप्‍पणियां:

अशोक पाण्डेय ने कहा…

जिन्हें अपना बनने में कई बरस लग गए
देखिये एक ही झटके में वे बेगाने हो गए.

अच्‍छा लिखा है आपने। रिश्‍ते बनाने में देर लगती है, बिगाड़ने में नहीं।

Nitish Raj ने कहा…

रिश्ते बनाते बनाते उम्र बीत जाती है पर बिगाड़ने के लिए एक पल काफी होता है। सही लिखा है।

nav pravah ने कहा…

अत्यन्त सुंदर रचना
आलोक सिंह "साहिल"

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन लिखा!!

शोभा ने कहा…

मिलना नसीब था या बिछड़ना नसीब है
पास आना नसीब था या दूर जाना नसीब है.

तुम ही इस सवाल का जबाब बताते जाओ
फ़िर हँसाना नसीब था या सिसकना नसीब है.

एक आशियाना सजाने में हस्ती मिट गई
हाले गम सुनाने में एक उम्र गुजर गई.

जिन्हें अपना बनने में कई बरस लग गए
देखिये एक ही झटके में वे बेगाने हो गए.
बहुत सुन्दर लिखा है। बधाई।

P. C. Rampuria ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ! सम्बन्ध बनाने में जन्मों
बीत जाते हैं पर तोड़ने में एक लम्हा ही काफी है !
शुभकामनाएं !

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

तुम ही इस सवाल का जबाब बताते जाओ
फ़िर हँसाना नसीब था या सिसकना नसीब है.
Bahut sunder

राज भाटिय़ा ने कहा…

क्या बात हे महेन्दर जी, आज तो दिल ही ले गये आप, बहुत ही सुन्दर भाव
धन्यवाद

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

मिलना नसीब था या बिछड़ना नसीब है
पास आना नसीब था या दूर जाना नसीब है.
bahut sundar pankityaan hain
krupya mera blog aapki sosochee main jodkar anugraheet kare