19.9.08

कहानी : सीखने की पहली शर्त है पर्याप्त समय और धैर्यता

आज अखबार में एक बड़ी सुंदर कहानी पढ़ी जोकि काफी रोचक और प्रेरक है उसका साराश प्रस्तुत कर रहा हूँ .

एक युवक किसी भी कार्य को सीखने में हमेशा हडबडी करता था और इस हडबडी का परिणाम यह हुआ कि वह कोई भी काम पूरी तरह से सीख नही पता था . एक दिन वह सीखने की मंशा के साथ एक जौहरी के पास काम मँगाने गया और उसने जौहरी से कहा कि मै रत्न परखने का काम सीखना चाहता हूँ तो जौहरी ने उसे समझाया कि भाई तुम कोई दूसरा काम सीख लो रत्न परखने के काम को सीखने में काफी समय लगेगा . युवक ने उससे कहा कि वह इस काम सीखने कि इच्छा रखता हूँ और इस काम को सीखने में मै अपना पूरा समय दूंगा .

दूसरे दिन से युवक ने काम शुरू किया . जौहरी ने उसे एक पत्थर दिया और कहा इस पत्थर को तुम रख लो जब मै शाम को आऊंगा तुम इसे मुझे वापिस कर देना . शाम को जौहरी ने वह पत्थर उस युवक से वापिस ले लिया . इस तरह से जौहरी रोज सुबह उस युवक को इक पत्थर देता और शाम को आकार वह पत्थर उस युवक से वापिस ले लेता . इस तरह से कई दिन गुजर गए आखिरकार एक दिन वह युबक झल्ला गया कि सेठ रोज मुझे एक पत्थर देता है और वापिस ले लेता है बस मै दिन भर पत्थर संभाले रख रहता हूँ पर आखिर मै कुछ भी नही सीख रहा हूँ और अभी तक मुझे एक भी पत्थर की पहचान भी नही हुई है . वह युवक हताश होने लगा .

एक दिन वह तय कर दूकान पहुँचा और उसने दुकानदार को कहा कि सिखाना है तो तरीके से सिखाओ मै तुम्हारा पत्थर हाथ में लेकर .लिये दिनभर बैठा नही रहूँगा . अब मै कोई दूसरा काम सीखूंगा . जौहरी ने उसके हाथ में कुछ देना चाहा तो युवक ने लेने से इनकार कर दिया मुझे काम करना है . जौहरी ने मुस्कुराते हुए कहा कि तुम्हे काम ही दे रहा हूँ कहते हुए उस युवक के हाथ में एक हीरा तराशने के लिये रख दिया . जौहरी ने उस युवक से कहा कि भी काम को सीखने के लिये अब तुम में पर्याप्त धैर्य आ गया है . किसी भी कार्य को सीखने के लिये पर्याप्त समय देना सबसे जादा जरुरी है और साथ ही पर्याप्त धैर्यता और लगन का होना भी नितांत आवश्यक है . कोई भी कार्य सीखने में हडबडी नही करना चाहिए .

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9 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

प्रेरक कथा. बहुत आभार.

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

bahut kuch seekha rahi hai apki kahaani

सचिन मिश्रा ने कहा…

jankari ke liye aabhar.

जितेन्द़ भगत ने कहा…

सच कहा- अधीरता से बनता काम भी बि‍गड़ जाता है। प्रेरक।

भवेश झा ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
भवेश झा ने कहा…

es lekh ko padhkar kafi kuchh yad aa gai, dhnyabad

Anil Pusadkar ने कहा…

सच कहा महेन्द्र भाई आपने,लेकिन आज का युवा शार्टकट चाहता है,ये बडी परेशानी है।प्रेरक कहानी पढाई आपने ,आभार आपका

seema gupta ने कहा…

"thanks for this inspiring artical, great to read"

Regards

GIRISH BILLORE MUKUL ने कहा…

abhaar
naice