11.10.08

डाक्टर विजय तिवारी "किसलय" की एक सुंदर रचना "लहू की लाज"

डाक्टर विजय तिवारी "किसलय" जबलपुर संस्कारधानी के युवा कवि है और मेरे अच्छे मित्र है . समय समय पर इनकी काव्य रचना प्रकाशित होती रहती है . पुस्तक " किसलय के काव्य सुमन " डाक्टर तिवारी द्वारा रचित है . इनकी पुस्तक मरुस्थल में हरित भूमि के मानिंद है और द्विवेदी युगीन काव्य धारा का स्मरण कराने वाली गंभीर द्रष्टि की परिचायक कृति है. बर्तमान में विजय तिवारी जी एम.पी.लेखक संघ,कहानी मंच, मिलन.पाथेय मंच, मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल हिन्दी परिषद् आदि से सम्बद्ध है . आज मै अपने कवि मित्र भाई विजय तिवारी जी की एक सुंदर रचना "लहू की लाज" आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ .

लहू की लाज

राह श्रेष्ट है मानवता की
इसको तुम अपना लेना
जेब किसी की खाली हो
उसको निज संबल देना.

न्याय धर्म की पतवारो से
जीवन नैया पार लगना
द्रव्यमान होने पर भी तुम
नम्र भाव को नही भुलाना.

अहित न हो दुर्बल दलितों का
उनके हित में हाथ बँटाना
ग्रहण किए निज कर्म ज्ञान से
प्रगति राह से आगे बढ़ते जाना.

वाकशक्ति के पावन श्रम का
सही अर्थ सबको समझाना
लज्जित न हो लहू तुम्हारा
ऐसा बल वैभव दिखलाना.

लेखक - डाक्टर विजय तिवारी "किसलय"
पुस्तक किसलय के काव्य सुमन से रचना साभार
जबलपुर.
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4 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत बढिया रचना प्रेषित की है।आभार।

शोभा ने कहा…

वाह! बहुत सुंदर लिखा है.

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

भाई महेंद्र जी
नमस्कार

सबसे पहले मेरा आभार स्वीकार करें.
आपका स्नेह ही है की आप
मुझे इतना महत्त्व देतेब हैं और
आज आपने , मेरी 'लहू की लाज'
कविता प्रकाशित कर सिद्ध भी कर
दिया है की आप मेरे शुभ चिन्तक
और अपने हैं
ऐसा ही स्नेह बनाये रखें
आपका
विजय तिवारी किसलय
जबलपुर

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता !
डाक्टर विजय तिवारी जी को हमारी तरफ़ से आभार,ओर आप का धन्यवाद