8.11.08

व्यंग्य : हमरे ब्लॉगर भैय्या चुनाव के पहले चित्त हो गए ....

हमरे एक दोस्त है . भैय्या बात इ है कै वे कछु दिनन से ब्लॉग लिखन लगे है और बेवा जगत में बड़ा नाम कमाईलियन है . मै उनका तनिक भी इस पत्रा में नाम न लिख्वे करू . कायके कहूं भैय्या खो पता चलवे करे तो तो समझो अपनी खैर नही.

मै उनको काल्पनिक नाम रामरतन हिन्दी ब्लॉगर इ पात्र में लिख देत हो . अपने रामरतन हिन्दी बिलागरवा है कछुक दिनों में उन्होंने बड़ा नाम कमा लिया है . जर्मनी कनाडा अमेरिका सिंगापुर और भारत के सभी नामी गिरामी शहरों के ब्लॉगर उनकी बेवा साइड में टीप देने वो का बोलत है कमेंस देने आत है सो अपने रामरतन ब्लागरवा को भारी घमंड हो गया है रात दिनन कम्पूटरवा में अपनी अंगुलियाँ ठोकत रहत है और अपनी आंखे फोडत रहत है.

सरकारी कर्मचारी है सो ब्लॉग से कमाई भी नही कर सकत है और विज्ञापन की पर्ची भी नही चिपका सकत है . कही कमाई का किसी को पता चल गया सो सर मुढाये बिना ओले पड़ने का खतरा अधिक है . पर अपने भैय्या है बड़े लालची हमेशा पैसो की जुगत करत रहत है.

अब हमरे प्रदेशवा में चुनाव का माहौल चल रहा है . उम्मीदवारों ने फॉर्म जमा कर दिए है और अपनी सम्पति का ब्यौरा भी चुनाव आयोग को दे दिए है . जो नाक पोछत थे जो साईकिल की टूटी सीट पर बैठकर सवारी किया करते थे आज वे करोड़पति है उनको चुनाव लड़ने की झंडी मिल गई है वे मैदाने ज़ंग में उतरने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाने में लगे है और रुपया पैसा पानी की तरह बहा रहे है क्योकि उन्हें मालूम है कि जीतने के बाद एक करोड़पति से दशानन करोड़पति बन जावेंगे.

खैर छोडिये अब अपना अपने असल मुद्दे पे वापिस चल पडत है . हाँ ब्लॉगर भइया रामरतन को किसी ने सलाह दे डाली कि भैय्या जुगत बैठा लो और इस चुनाव में वेव साइड में किसी नेता का प्रचार कर डारो और कमाई कर डारो मौका है भइया . अपने रामरतन भैय्याँ जी जुगत भिड़ने में जुट गए ..

एक दिन अपने क्षेत्र के अंगूठा छाप पूर्व विधायक भौतई पैसन वाले है को ख़बर मिली कि अपने रामरतन हिन्दी ब्लॉगर है विश्व में उनकी चार चार वेवसाइड को लोग चाव लेकर पढ़त है देश विदेश के लोग टीप देने उनके ब्लागरवा में आत है क्यो न अपन अपना चुनाव प्रचार वेवसाइड में करा दे देश विदेश में प्रचार होगा नाम होगा दूर से वोट मिल जावेगी . सो झट से अपने रामरतन ब्लागरवा के पास अपनी लकदक कार लेकर पहुँच गए.

अपने भैय्याँ जी को प्रचार करने को कहा और ढेर सा पैसा देने कि बात भी कही . अपने भैय्याँ जी टेस में आ गएँ झट से उनई के सामने अपने ब्लागवा में उनका प्रचार लिखने लगे.

इसी बीच का भओ कि वहां अपुन पहुँच गए और अपुन ने जुगत से सारी बातें सुनी और अपनी ताजी ताजी खोपडी से समझी और फ़िर एक कोने में उ नेता को ले गया और उसे समझाया -

भइया तुम लगे हो चुनाव विधानसभा का है तो तुम अपनों प्रचार पूरे विश्व में कराना चाहते हो का तुम्हे सारी दुनिया के लोग वोट देवे आहे . जा बताओ तुम्हे वोट विधान सभा क्षेत्र से मिलने है कै सारी दुनिया से . तुम्ह के नाहक पैसा खर्चा करत हो और समय ख़राब करत हो . नेताजी ने अपनी खोपडी खुजाई फ़िर उसके बाद बात उनके समझ में कुछ आई और और तुंरत अपनी लकदक कार से वहां से फ़ुट लिए .

यह देखकर हमरे बड्डे को खूब गुस्सा आई और उन्होंने मुझे खूब लाल पीली ankhe दिखाई और दहाड़ कर बोले यार तुमने मेरी होने वाली कमाई पर पानी फेर दिया यार मेरा मुंडा ख़राब हो गया है तुम यहाँ से फ़ुट जाओ .

फ़िर का है कि अपुन भी ठहरे ब्लॉगर भैय्या सो अपुन ने भी छूट गोली चलाई और भैय्याँ से कहाँ शुक्र करो -

रामरतन मेरे आने के कारण तुम बच गए वरना चुनाव में नेताजी का प्रचार करने के आरोप में तुम्हारी सरकारी नौकरी चली जाती फ़िर उसके बाद तुम रोड पर पचास रुपये रोज पर राजनीतिक दलों का झंडा लेकर घूमते नजर आते .

यह सुनकर अपने रामरतन भैय्याँ ने सर झुका लिया . इसके बाद मै भी यह कहते हुए वापिस लौट गया "कि वेवकूफो की दुनिया में कमी नही है" . सुना है कि तब से अपने ब्लागर भैय्याँ घर में बीमार पड़े है और मुझे जरुर कोस रहे होंगे.

आखिर आप सभी बताईं कि इसमे हमरी का गलती है मैंने तो उसकी सरकारी नौकरी बचाई और नेताजी के वेवाजगत में प्रचार में नाहक खर्च होने वाले रूपये पैशैन बचाओ . पैसा की लालच में चुन्नव होने के पहले अपने ब्लागरवा भैय्या रामरतन पहले से चित्त हो गए है अब आप ही बताइन कि इस्मा हमरी का गलती है.

व्यंग्य - महेंद्र मिश्रा रचनाकार.

13 टिप्‍पणियां:

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

महेंद्र जी
नमस्कार
क्या बात है भाई . बहुत अच्छा व्यंग्य लिखा है , जिस ब्लोगर पर भी लिखा हो?
आप ने तो ;;; आम के आम ,गुठलियों के दाम ;;; वाली कहावत चरितार्थ कर दी
एक तरफ़ नसीहत और दूसरी तताफ़ से नेता जी की बचत,
कछु कछु हमौखें समझ में आ रौ हे , जू ब्लोगरवा कौन हो सकत हे ?
आपका
विजय तिवारी ' किसलय "

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

हा हा हा...बहुत खूब भइया...

रामरतन ब्लागरवा के आप बचाए, फिर भी ऊ गुसियाया है आपके साथ. आजसे उसके ब्लागवा पर हम टिपण्णी ना करब. बहुत धमाकेदार लिखे हैं. पूरा फुलटुस मज़ा आई गवा.

Vivek Gupta ने कहा…

सुंदर व्यंग्य |

seema gupta ने कहा…

" baap re baap..."

Regards

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत खुब , भईया समझ मै नही आया आप ने बचाया किस को ओर मरवाया किस को... मुझे तो लगता है आपने गरीब जनता को बचा लिया, बहुत ही मजे दार व्यंग
धन्यवाद

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" ने कहा…

प्रिय महेंद्र जी
सादर अभिवादन
आपने ये जो 09926382551 नंबर अपने ब्लॉग पे दाल रखा है
किसी शुक्ला जी का है ,,,,,,,,,,,,यदि शुक्ला जी को तंगाना ही है
तो आप कृपया कोई और तरीका खोज लीजिए भैया
वैसे मुझे मालूम है ,,,,,,,,,,,,,कहो तो कह दूँ ............?
खैर छोड़िए आज की ;पोस्ट ने तो ऊपर वाली बात का मामला ही
कूल कर दिया . मुझे उत्साह से भर दिया आपका आभार
हार्दिक अभिवादन

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

गिरीश जी कृपया काल करे मोबाइल 9926382551 पर .यह मेरा नम्बर है . यह किसी शुक्ला जी का नम्बर नही है . शायद आपको गलतफहमी हो गई है . सभी जबलपुर के मुझसे इसी पर बात करते है . शायद आगे ० की वजह से . शुक्रिया . मुझे शुक्ला जी से क्या लेना देना और न मै उनको जानता हूँ .

Udan Tashtari ने कहा…

ये किस दिशा में निशाना है पंडित जी. :) है सटीक!!

श्रृद्धा जी को जन्म दिन की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

समीर यादव ने कहा…

फ़िर का है कि अपुन भी ठहरे ब्लॉगर भैय्या सो अपुन ने भी छूट गोली चलाई और भैय्याँ से कहाँ शुक्र करो -

सही कह रहे हैं...मिश्राजी.....एक ब्लॉगर ही दुसरे ब्लॉगर का दर्द समझ सकता है..
इन नेताओं से कोई उम्मीद भी नहीं....यह व्यंग्य आपके चुटीले चुटकुलों से किसी मायने में कम हास्य पूर्ण नहीं.

sandhyagupta ने कहा…

Bahut achche.

guptasandhya.blogspot.com

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah..wa

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

पायोजी, मैं तो रामरतन धन पायो! यह पोस्ट पढ़ कर!

संजीव तिवारी ने कहा…

रामरतन को हमारा सलाम । और मिश्रा जी ये गिरीश भाई का पूछ रहें हैं और आप का कह रहें हैं, हम तो समझे नई पाय रहे हैं ।


खैर जउन भी होवे 'रामरतन' जिंदाबाद, नेताजी जिंदाबाद !

अब हौसला हम नई बढावेंगें तो कउन पूछेगा बिचारे बिलागरवा को ।