27.3.09

व्यंग्य - ब्लॉगर बंधु भाई भाई

ब्लागिंग जगत में अपने चिकना ब्लॉगर और वैशाखी नाम के दो ब्लॉगर थे जो सारी दुनिया में ब्लागर शिरोमणि बनना चाहते थे . दोनों को अपनी लेखनी पर भंयकर नाज था इसके लिए उन्होंने बड्डे ब्लॉगर और छोटा हाथी नामक ब्लागरो के भगवानो की जमकर पूजा की जिससे दोनों ब्लागरो के भगवान प्रसन्न हो गए और बोले तुम्हे क्या वर चाहिए तो तपाक से वैशाखी ब्लॉगर बोला भगवान आप तो मुझे ब्लॉगर शिरोमणि बनवा दे मै जो लिखू और कहूँ वह स्वयं सिद्ध हो जाये मै जो कहूं वही हो . मै जिसको ब्लॉगर कहूं वह ब्लॉगर माना जाये और जिसको न कहूं वह ब्लॉगर न माना जाये. ब्लॉगर भगवानो ने तथास्तु कहा और उन्होंने अपनी राह पकड़ ली.



वैशाखी ब्लॉगर

चिकना ब्लॉगर और वैशाखी ब्लॉगर के भावः बढ़ गए और उनका घमंड सांतवे आसमान पे चढ़ गया. अब दोनों ने एलान किया कि निम्नाकित ब्लॉगर सिर्फ मेरे कस्बे के है और जो अनजाने इस कस्बे में है वो ब्लॉगर नहीं है. आखिरकार बात ब्लागरो के भगवानो तक पहुँच गई और ब्लॉगर भगवान को भी लगने लगा कि दोनों की अक्ल को ठिकाने लगा देना चाहिए वरना ये अपने लिए भविष्य में खतरे की घटी बजवा देंगे.

भगवान ने दोनों ब्लागरो को सलाह दी भाई तुम दोनों कलम बहुत अच्छी चलाते हो तुम्हे अपनी कलम की ताकत का घमंड है. तुम दोनों में श्रेष्ट कौन है इसका फैसला होना जरुरी हो गया है. तुम दोनों अपनी अपनी कलमो में स्याही भरा लो और फैसला करने के लिए अखाडे चलो . दोनों ब्लागर कलम लेकर अखाडे पहुँच गए और लगे और लगे आपस में कलम भांजना शुरू कर दिया. कलम भांजते भांजते दोनों आपस में लड़ पड़े . चिकना ब्लॉगर और वैशाखी ब्लॉगर को इससे कोई फायदा नहीं पहुंचा और आखिरकार और दोनों शक्तिहीन हो गए और कही के न रह गए .. आजकल किसी की बखिया उखाड़ने में और उसको नीचा करने की कोशिश में लगे रहते है और अपने आपको अच्छा साबित करने की कोशिश में है पर वे नहीं जानते है जो दूसरो के लिए गड्डा खोदता है पहले वह ही उसी में गिर जाता है.

सीख- कि कभी ख्याली पुलाव मत पकाओ . किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सतत खुद मेहनत करना चाहिए. कभी किसी की निंदा न करे अगर करे तो खुलकर करे.


व्यंग्य-
महेंद्र मिश्र
जबलपुर.

रिमार्क - यदि कोई व्यंग्य आलेख लिखा जाता है तो उसका अर्थ अनर्थ न निकाला जाये यही मेरी आप सभी से प्रार्थना है सिर्फ पढ़कर ही एन्जॉय करे जिससे मेरा भी लिखने का हौसला बना रहे . व्यंग्य तभी लिखे जा सकते है खुद को उस व्यंग्य पार्ट का पात्र बना लिया जाये तभी वह रोचक हो सकता है. व्यंग्य तो व्यंग्य होते है व्यंग्य को व्यंग्य समझकर महज कृप्या अपने ऊपर न लें ..

23 टिप्‍पणियां:

seema gupta ने कहा…

" ha ha ha ha ha ha ha ha ha ha rochak.."

regards

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

खयाली पुलाव नहीं पकाऐंगे तो ब्लागरी कैसे करेंगे?

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

मिश्र जी
पहली बात तो यह कि ब्लॉगिंग में कलम चलाई ही नहीं जाती. यहां तो की बोर्ड पर उंगलियां चटकाई जाती हैं. फिर वे दोनों कलम भांजते-भांजते कैसे भिड़े? मैं नहीं यक़ीन करता आपकी बात पर जी.

vandana ने कहा…

vyang to vyang hai phir sochna kya aur kehna kya.

Suresh Chiplunkar ने कहा…

इतनी छोटी पोस्ट और "इतना बड़ा रिमार्क" :) हे हे हे हे… हमने भी व्यंग्य को व्यंग्य की तरह ही लिया है… :)

आलोक सिंह ने कहा…

व्यंग के साथ साथ बहुत अच्छी सीख "किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सतत खुद मेहनत करना चाहिए"

ajay kumar jha ने कहा…

bahut badhiyaa mahendra bhai, bhigaa bhigaa kar patakiye jyadaa majaa aa raha hai, kamaal hai.

neeshoo ने कहा…

आपकी बार को रिमार्क कर लिया है सर जी । सीख से सीख लिया ।

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

vaakai khayaalee pulav nahin hakeekat par vishvaas karen
- vijay

रश्मि प्रभा ने कहा…

किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सतत खुद मेहनत करना चाहिए.
sahi nishkarsh hai aur ye bhi satya hai ki kisi bhi baat ka alag arth nahi nikalna chahiye

P.N. Subramanian ने कहा…

व्यंग ही सही पर सही तो कहा है. आभार.

bhootnath( भूतनाथ) ने कहा…

लो ले लिया हमने इसे अपने ऊपर....अब बिगाड़ लो आप हमारा क्या बिगाड़ते हो....आप व्यंग्य करोगे...तो हम हास्य बिखेर देंगे......!!

बवाल ने कहा…

हा हा पण्डितजी आप भी ना ! हमेशा लोगों को डराते रहते हो । बिल्कुल रामसे ब्रदर्स की स्टाइल में।

अरे भाई हम तो यही कहते हैं कि ऐसे व्यंग लिखे ही क्यूँ जाएँ जिनके बाद निम्नलिखित वैधानिक चेतावनी देना पड़े :-

रिमार्क - यदि कोई व्यंग्य आलेख लिखा जाता है तो उसका अर्थ अनर्थ न निकाला जाये यही मेरी आप सभी से प्रार्थना है सिर्फ पढ़कर ही एन्जॉय करे जिससे मेरा भी लिखने का हौसला बना रहे . व्यंग्य तभी लिखे जा सकते है खुद को उस व्यंग्य पार्ट का पात्र बना लिया जाये तभी वह रोचक हो सकता है. व्यंग्य तो व्यंग्य होते है.
व्यंग्य को व्यंग्य समझकर महज कृप्या अपने ऊपर न लें .


हा हा हा ये व्यंग का ब्रदर हास्य है, इसे भी अपने ऊपर ना लें। हा हा ।
नर्मदे हर ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

व्यंग को व्यंग ही रहने दो कोई नाम ना दो... हम ने भी इसे व्यंग ही समझा है कुछ ओर नही,
धन्यवाद
रिमार्क... व्यंग्य - ब्लॉगर बंधु भाई भाई अजी नारिया भी तो लिखती है ? क्या उन के लिये नही है यह लेख ? अगर है तो उन्हे संबोधन क्यो नही किया ???

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi ने कहा…

जहां बोल्‍ड किया हुआ था वहां मैं क्लिक कर चिकने और वैसाखी ब्‍लॉगर तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था। :)


भगवान का शुक्र है कि आपने किसी का लिंक नहीं दिया।


हें हें हें हें हा हा हा हा हो हो हो हो

निरन्तर- महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भाई सिद्धार्थ जी
व्यंग्य है यह किसी पर आक्षेप करने के लिए नहीं लिखा गया है इसीलिए लिंक देने का प्रश्न ही नहीं होता है बल्कि मेरे धुर विरोधी मुझे नीचा दिखने के लिए कही मेरे ब्लॉग का नाम तक लिख देते है परन्तु मेरी इसी गिरी मानसिकता नहीं रही है . वरन सत्य यह है जो देखा सुना जाता है वही हकीकत ऊकेरी जाती है . मै कोई व्यंग्यकार नहीं हूँ लिखने की एक छोटी सी कोशिश जरुर कर रहा हूँ . टीप के लिए आपका आभारी हूँ .

संजय बेंगाणी ने कहा…

ऐसे देखने में यह व्यंग्य लग रहा है, वैसाखी वाली बात भी ज्ञान के अभाव के संदर्भ में लग रही है, मगर गिरिश बिल्लोरेजी का मेल देख कर लगता है यह कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना वाली बात तो नहीं. अगर ऐसा है तो यह अफसोसजनक है.

अन्यथा व्यंग्य के रूप में ठीक है. निर्णय आप पर है.

रंजना ने कहा…

आप तो सिद्ध हस्त हैं....सब कुछ कितनी कुशलता से लिख लेते हैं....व्यंग्य भी !!

निरन्तर- महेन्द्र मिश्र ने कहा…

संजय जी
कतई ऐसा नहीं है शायद गिरीश जी का ऐसा सोचना हो सकता है .. ...इस पोस्ट में मैंने किसी का व्यक्तिगत नाम नहीं लिखा है . अगर कोई समझे वह उनकी सोच हो सकती है बल्कि मेरे नाम और मेरे ब्लॉग समयचक्र व् निरन्तर का नाम तो कई जन ले लेते है मगर मै नाम नहीं लेता हूँ. हर आदमी की सोच और विचार एक से नहीं हो सकते है किसी की व्यक्तिगत सोच के लिए मै जिम्मेदार नहीं हूँ . आभार टीप के लिए .

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

यह सर्वथा झूठ है महेंद्र भाई की आप मुझे अपमानित नहीं करते इसके पुख्ता सबूत हैं मेरे पास . और इस आलेख की प्रति मैंने सुरक्षित कर ली है .वैसे आपकी इन कोशिशों से न तो मेरा अभियान अवरुद्ध हुआ है और न ही मेरे वेतन भत्ते
मुझे सारी बातों की जानकारी है आप से अनुरोध है की आप मेरे साथ बैठ कर हर बिंदु पर विमर्श कर सकतें hai किन्तु इस तरह की पोस्टों से जो वैयक्तिक हों सदा यश मलिन ही होता है . आप मेरे लिए इतना वक़्त मत खराब कीजिए यदि यही समय आप गंभीर चिंतन में लगाकर पोस्ट लिखेंगे तो आपके आलेख शायद कई जीवनों को सही दिशा देंगें . शायद मुझे भी किन्तु जो तरीका आप अपना रहे हैं वो अपमान जनक है जिसके लिए मुझे कानूनी और सामाजिक अधिकार प्राप्त है
Sadar
Girish Billore "Mukul"

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

गिरीश जी
आप सरासर गलत है आप हमेशा मेरा नाम न लेकर कभी ब्लॉग निरन्तर का या कुछ भी लिख देते है कभी नागफनी क्या यह गलत नहीं है . मैंने तो आपके खिलाफ कभी कुछ भी नहीं लिखा है यदि मै आपका नाम लिखूं तो आपको कानूनी कार्यवाही करने का अधिकार है . मै भी कार्यवाही कर सकता हूँ कोई मै अनुगूठा छाप नहीं हूँ . किसी भी बात को बिना समझे आप विवाद को आप हमेशा तूल देते रहते है . रहा न मै कोई लेखक हूँ और न व्यंग्यकार है कोशिश जरुर लिखने की कर रहा हूँ . आप तो हमेशा मेरा अपमान करते है यह कोई नई बात नहीं है सभी को ज्ञात है .यदि आपको मेरा ब्लागिंग करना पसंद नहीं है तो मै ब्लॉग लेखन भी बंद कर सकता हूँ .

"मुकुल:प्रस्तोता:बावरे फकीरा " ने कहा…

शुक्रिया यदि आप यह नहीं कर रहे हैं तो
आप बधाई के पात्र इस लिए भी हैं क्योंकि आप
ही इस शहर के हम सबसे पुराने ब्लॉगर हैं
हमें आपसे लाइन मिली किन्तु आपने मुझे समझने में गलती हुई
है मुझे मालूम है. आपकी भावनाएं शब्द के प्रयोग को लेकर हो तो
गलत है बताइये मुझे अपने आलेखों में किन शब्दों का अनुप्रयोग करना
किनका नहीं किन पर आपको आपत्ति है किन पर नहीं ये हम कैसे जानें
रही ब्लागिंग बंद करने की बात तो आप अपने निर्णय स्वयं लीजिये
किसी को इन बातों से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए .
"वो अफसाना जिसे ......................."

अब शायद ही आपसे बात करुँ या प्रति टिप्पणी करुँ
सादर अभिवादन

डुबेजी ने कहा…

ye kya ho raha hai .......bhai