11.4.09

मुस्कुरा कर इस दिल पे वे जख्म देते है

वफ़ा की खुशबू हर रह गुजर से आती है
वफ़ा की खुशबू यारा कजां से भी आती है.

हम साथी संगदिल..मुझे बेवफा कहते है
वफ़ा की खुशबू उनके लबों से आती है.

उनके प्यार में रुसवा होता जा रहा हूँ
मै अश्को से वफ़ा के दाग मिटा रहा हूँ.

अफसाना उनके प्यार का दिल से देखो
उनका सटीक निशाना इस दिल पे देखो.

मुस्कुरा कर इस दिल पे वे जख्म देते है
दिल के करीब आने का ये बहाना देखो.

दिल टूटता है तो आहट भी नहीं होती है
रिश्ता जान का दिल से दूर हो जाता है.

अपना जो राहे वफ़ा में हमसफ़र होता है
अक्सर वही करीब होकर दूर हो जाता है.
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7 टिप्‍पणियां:

परमजीत बाली ने कहा…

अच्छी गजल।
मुस्कुरा कर इस दिल पे वे जख्म देते है
दिल के करीब आने का ये बहाना देखो.

"अर्श" ने कहा…

dusare she'r ke kya kahane.. bahot khub likha hai aapne ... badhayee... ek aur baat ye ke aap mere blog tippanikaar me 999 pe hai... iskeliye shukriya aapka...


abhaar

arsh

जितेन्द़ भगत ने कहा…

वाह, खूबसूरत पंक्‍ति‍यॉं-
अपना जो राहे वफ़ा में हमसफ़र होता है
अक्सर वही करीब होकर दूर हो जाता है.

P.N. Subramanian ने कहा…

आपके नगमो से हमें लगने लगा कि हम फिर जवाँ हो रहे हैं. आभार.

अनिल कान्त : ने कहा…

ekdum mast ....padhkar maza aa gaya

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

अफसाना उनके प्यार का दिल से देखो
उनका सटीक निशाना इस दिल पे देखो..
बहुत खूब मिश्र जी .

रश्मि प्रभा ने कहा…

is gazal ko sur aur swar mil jaayen to kya kahne