हे सदगुरु जब तक न तुम न मिलो इस जीवन में
शांति कहाँ मिल सकती है भटकते अतृप्त मन में.
खोजा फिरा संसार सदगुरु एक तुम्ही आधार सदगुरु
कैसा भी तारन हारा मिले न जब तक शरण सहारा.
प्रभु तुम ही विविध रूपों में हमें बचाते भाव कूपो से
ऐसे परम उदार सदगुरु एक तुम्ही हो आधार सदगुरु.
छा जाता जग में अँधियारा तब पाने प्रकाश की धारा
आते है तेरे द्वार सदगुरु एक तुम्ही आधार हो सदगुरु.
हम आये है द्वार तुम्हारे तुम्ही उद्धार करो दुःख हारे
सुनलो इस दास की पुकार सदगुरु एक तुम्ही आधार.
.....
शांति कहाँ मिल सकती है भटकते अतृप्त मन में.
खोजा फिरा संसार सदगुरु एक तुम्ही आधार सदगुरु
कैसा भी तारन हारा मिले न जब तक शरण सहारा.
प्रभु तुम ही विविध रूपों में हमें बचाते भाव कूपो से
ऐसे परम उदार सदगुरु एक तुम्ही हो आधार सदगुरु.
छा जाता जग में अँधियारा तब पाने प्रकाश की धारा
आते है तेरे द्वार सदगुरु एक तुम्ही आधार हो सदगुरु.
हम आये है द्वार तुम्हारे तुम्ही उद्धार करो दुःख हारे
सुनलो इस दास की पुकार सदगुरु एक तुम्ही आधार.
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8 टिप्पणियां:
Sadguru..Sachcha Aadhar hai.
inake bina jiwan bekaar hai.
sundar vichar...badhayi..
नमन करता हूँ आपके इस रचना को ...........
बहुत सुंदर और आत्मिक शांति प्रदान करती पोस्ट.
रामराम.
वाह्! अति सुन्दर इस भक्तिमय रचना के लिए साधुवाद।
जै गुरूदेव्!!
हम आये है द्वार तुम्हारे तुम्ही उद्धार करो दुःख हारे
सुनलो इस दास की पुकार सदगुरु एक तुम्ही आधार.
" हर दिल की यही पुकार , बडी ही सुकून भरी रचना"
अत्यंत सुन्दर
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मानव मस्तिष्क पढ़ना संभव
प्रणाम सदगुरु . नमन .............आपको भी नमन महेन्द्र जी
खोजा फिरा संसार सदगुरु एक तुम्ही आधार सदगुरु
कैसा भी तारन हारा मिले न जब तक शरण सहारा.
wo jo bhi hjai....
...wo hi tab tha wo hi ab hai....
...wo hi rahegaa !!
.... is SAMAYCHAKRA main
NIRANTAR........
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