3.4.09

जख्मो के फूल दिल की चादर पर बिछे है

जख्मो के फूल दिल की चादर पर बिछे है
ये तोहफे तुझसे मैंने मोहब्बत कर पाए है.

उनकी यादो का नशा दो चार दिन रहेगा
जब दिल से उतरेगा कोई दीवाना न होगा.

अब दुश्मनों से नहीं अब दोस्तों से गिला है
जो मिला था दोस्तों ने खंजर चला छीना है.

तेरी यादो के उजाले अब तेरे आलम में होंगे
तेरी बेवफाई के किस्से अब हर चर्चे में होंगे.

9 टिप्‍पणियां:

P.N. Subramanian ने कहा…

जख्मो ने क्या कुछ नहीं किया है. सुन्दर रचना.आभार

"अर्श" ने कहा…

AB AAGYE MISHARA JI APNE SAHI ROOP ME... YAHI TO KAATILAANA HAI... BAHOT KHUB LIKHA HAI AAPNE...
BADHAAYEE SWIKAAREN...

ARSH

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर जखम है आप के. धन्यवाद

Anil ने कहा…

काश किसी के साथ ऐसा न हो!

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

तेरी यादो के उजाले अब तेरे आलम में होंगे
तेरी बेवफाई के किस्से अब हर चर्चे में होंगे. ..
बहुत खूब .

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर रचना है ... बधाई।

अनिल कान्त : ने कहा…

बहुत ही अच्छी लगी मुझे आपकी ये रचना


मेरा अपना जहान

रश्मि प्रभा ने कहा…

अब दुश्मनों से नहीं अब दोस्तों से गिला है
जो मिला था दोस्तों ने खंजर चला छीना है.
......... bahut hi achhi

vandana ने कहा…

zakhmon ke phool dil ki chadr par biche hain
ue tohfe tujhse maine mohabbat kar paye hain

kya khoob kaha aapne,mohabbat ke tohfe aise hi hote hain....sahej kar rakhne ke liye.