16.6.09

इश्क की दुनिया में में कई आशिक उलझते रहे है

इश्क की दुनिया में....कई आशिक उलझते रहे है
चले गए दुनिया से इश्क को खुदा सा पूजते रहे है.

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प्यारी नजर से न देखो कही हम बेहोश न हो जाए
इश्क के सागर में न उतरो कही मदहोश न हो जाए.

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8 टिप्‍पणियां:

अनिल कान्त ने कहा…

waah !!

रंजन (Ranjan) ने कहा…

बहुत अच्छा!!१

ओम आर्य ने कहा…

प्यारी नजर से न देखो कही हम बेहोश न हो जाए
इश्क के सागर में न उतरो कही मदहोश न हो जाए.

bahut sundar......madhosh kar dene wala sher.....aise hi likhate rahe

Shiv ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव हैं. दोनों शेर लाजवाब कर देने वाले हैं.

Udan Tashtari ने कहा…

वाह जी पंडित जी..बढ़िया.

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

इश्क की दुनिया में....कई आशिक उलझते रहे है
चले गए दुनिया से इश्क को खुदा सा पूजते रहे है.
बढियां लाइनें ,बधाई .

राज भाटिय़ा ने कहा…

वाह वाह क्या बात है, हम तो शेर पढ कर ही बेहोश हो गये...

विजय तिवारी " किसलय " ने कहा…

इश्क को खुदा सा पूजते रहे है.
achchhi baat hai mishr jee.
-vijay