30.6.09

जहाँ भी बस मै देखता हूँ बसी है तुम्हारी यादें


तुम नजरे झुका कर देखती हो... जिस तरह
देखती हो इस तरह.. जैसे कुछ भी नहीं देखा.

oooooo

अपना हाले दिल लेकर कहाँ तुझे खोजने जाऊं
जहाँ भी बस मै देखता हूँ बसी है तुम्हारी यादें.

oooooo

तेरे इस हसीन चेहरे को देख खूब प्यार आता है
हँस कर जालिम ने कहा आप को क्या आता है.

11 टिप्‍पणियां:

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

वाह,क्या प्यार भरी प्रस्तुति,
मज़ा आ गया पढ़ कर,
बेहद उम्दा,बधाई

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत सुन्दर।

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विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर महेंदर जी लाजवाब.
धन्यवाद

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत लाजवाब.

रामराम.

अजय कुमार झा ने कहा…

का mahender भाई ...अभी ता बरसात झमाझम रूप नहीं पकडा है आप अभिये से इतना सेंटी आ रोमांटिक कर दीजियेगा...बढिया है लगे रहिये...मजा आ गया...

Udan Tashtari ने कहा…

भई वाह-क्या बात है!!

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

प्यार भरे खूबसूरत शेर! बधाई महेन्द्र जी।

P.N. Subramanian ने कहा…

बहुत ही सुन्दर शेर. काश जवानी में यह सब हमें मिलता!

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

तेरे इस हसीन चेहरे को देख खूब प्यार आता है
हँस कर जालिम ने कहा आप को क्या आता है...
बहुत सुन्दर.

ओम आर्य ने कहा…

bahut hi sundar ................

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

इसे ही कहते हैं प्‍यार की गहराई।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }