15.9.09

जब तेरे सितमो पे मर मिटे आबाद कभी बर्बाद हुए

तेरी यादे तुमसे बेहतर है तन्हाई में आ जाती है
याद जरुर आते होंगे अक्सर तुझे तन्हाइयो में.

यादो के सहारे जिन्दा है गर मर जाते जुदाई में
तेरी यादो में मै हर पल उदास खोया रहता हूँ.

कब सुबहो हुई कब शाम मुझे पता ही न चला
तेरी यादो को मैंने इस दिल से भुलाना चाहा.

इस दिल को तुम उतना ही खूब याद आये
हमें जब तेरी मोहब्बत में खूब ईनाम मिले.

और प्यार के बदले में मेरी वफ़ा को इल्जाम मिले
जब तेरे सितमो पे मर मिटे आबाद कभी बर्बाद हुए
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9 टिप्‍पणियां:

aarya ने कहा…

महेंद्र जी
सादर वन्दे !
सच तो ये है फूल का दिल भी छलनी है,
हसता चेहरा एक बहाना लगता है,

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

खूबसूरत रचना । आभार ।

ओम आर्य ने कहा…

वाह वाह
बहुत ही खुब

अतिसुन्दर
लाज़बाव

Mithilesh dubey ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना। बहुत-बहुत बधाई...

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

बहुत खूबसूरत रचना.

रामराम.

राज भाटिय़ा ने कहा…

vaah jI bahut sundar, majaburi hai roman me likhanaa

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

और प्यार के बदले में मेरी वफ़ा को इल्जाम मिले
जब तेरे सितमो पे मर मिटे आबाद कभी बर्बाद हुए


wah ye yadoon ka silsala adbjhoot laga...

जी.के. अवधिया ने कहा…

बहुत सुन्दर महेन्द्र जी!

vandana ने कहा…

waah waah............bahut sundar ahsason se labrej rachna.