19.11.08

यूँ ही चुपचाप से गुजर गया बहुत चाहने वाला..



शख्स कितना कमजोर था आइना बनाने वाला
जीतता रहा है वो अक्सर पत्थर बनाने वाला.

यूँ ही चुपचाप से गुजर गया बहुत चाहने वाला
महसूस किया पत्थर से मेरा दिल कुचल गया.

उनकी सजी संवरी हुई जुल्फे हाय क्या कहने
मैंने निगाह डाल कर जुल्फों को मैला कर दिया.

न सलाम याद रखना न मेरा पैगाम याद रखना
आरजू है जानी दिल में मेरा नाम याद रखना.

दिल को ठेस लगी है फाड़कर दिखा नही सकते
दिली ठेस को सुनाना चाहे तो सुना नही सकते.

............

12 टिप्‍पणियां:

sareetha ने कहा…

बढिया है । कविता से हटकर शायरी में हाथ आज़माने की कोशिश जारी रखिए ।

mehek ने कहा…

न सलाम याद रखना न मेरा पैगाम याद रखना
आरजू है जानी दिल में मेरा नाम याद रखना
waah bahut sundar

आलोक सिंह "साहिल" ने कहा…

FAAD DIYA BOSS aapne to,
nice poetry.
ALOK SINGH "SAHIL"

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

न सलाम याद रखना न मेरा पैगाम याद रखना
आरजू है जानी दिल में मेरा नाम याद रखना.

दिल को ठेस लगी है फाड़कर दिखा नही सकते
दिली ठेस को सुनाना चाहे तो सुना नही सकते.
bahut khoob

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया।

Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Dr. Vijay Tiwari "Kislay" ने कहा…

mahendra bhaai
aapke padya[kavita cum gazal] ke bhaav bade jor daar hain.
kash aise lekhan ko bhi sahitykaar SARAAHNE lagen.

aapke is prayog ko bhavishy tay karega ki ham aazad panchhiyon se saahityaakash men vichran kar paayenge athwa nahin
mere vichaar se sandesh sampreshan men saksham vaaky sadaiv achchhe lagte hi hain..

aapka
vijay

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

सुन्दर कविता और डेजलिंग फोटो।

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत खूब महेंद्र जी....लिखते रहिये...
नीरज

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

दोनों में मेरा मुवक्किल बनने की योग्यता है, कविता और चित्र दोनों कातिल हैं।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी ऎसा धांसु फ़ोटू लगोगे तो दिल को ठे्स तो लगे गई ही ना.
धन्यवाद

seema gupta ने कहा…

न सलाम याद रखना न मेरा पैगाम याद रखना
आरजू है जानी दिल में मेरा नाम याद रखना
" interetsing to read.."

Regards