20.5.09

अक्सर ऐसा हो रहा है - नेता : महगाई :गरीब और गरीबी

नेता

चुनाव दर चुनावों के बाद अक्सर नेता कुर्सी की गंध लेकर दिनोदिन मालामाल होता जाता है अक्सर ऐसा हो रहा है .

महगाई
चुनावों से पहले और चुनावों के बाद महंगाई दिनोदिन बढ़ती जाती है पर बढ़ती मंहगाई को रोकने हेतु चुनाव लड़ रहे नेता या चुनावों के बाद कुर्सी की गंध प्राप्त करने वाले नेता मंहगाई घटाने की चर्चा ही नहीं करते है क्या किसी को उपकृत करते है ? ऐसा क्यों होता है यह समझ से परे है अक्सर ऐसा हो रहा है .

गरीब और गरीबी
चुनावों के बाद बड़ी बड़ी बाते की जाने के बाद गरीब और गरीब होता जा रहा है और नेताओं के आश्वासन और मंहगाई के तले और दिनोदिन दम तोड़ता जा रहा है और गरीब होता जा रहा है अक्सर ऐसा हो रहा है.

नेताओं के हारने और जीतने पर समीक्षा की जाती है और बढ़ती मंहगाई और मंहगाई के तले दम तोड़ती गरीबी और चुनावों पूर्व दिए गाये वादों की समीक्षा नहीं की जाती है इसे जनमानस का दुर्भाग्य कहा जाये तो कोई बड़ी बात नहीं है . अक्सर ऐसा हो रहा है .

8 टिप्‍पणियां:

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

AKSAR (ya kahen ki HAR BAAR) AISA HI KYON HOTA HAI?

PREETI BARTHWAL ने कहा…

महंगाई और गरीबी की चिन्ता नेताओं को क्यो होगी उन्हें चिन्ता है अपनी कुर्सी की।

अनिल कान्त : ने कहा…

aapne bilkul sahi kaha hai
main bhi yahi baat soch raha tha

Udan Tashtari ने कहा…

समीक्षा उसकी की जाये जिसका ये नेता हल चाहते हों वरना तो करके भी क्या होगा?

सही प्रश्न है.

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

सही कह रहे हैं आप । समीक्षा कौन करेगा ? वह तो चुनाव जीत गये । अगली बार फिर समीक्षा करने का वायदा कर वोट माँगने आयेंगे ।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

हिमाशु जी
आपके विचारो से पूरी तरह सहमत हूँ . यही हो रहा है.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

चलिये, पांच साल बाद आप फिर यही पोस्ट हू-ब-हू पेश कर सकते हैं।

महामंत्री - तस्लीम ने कहा…

अक्सर नहीं भई, हमेशा ऐसा ही होता है।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }