21.2.09

जरा देखें तेरे चेहरे पे क्या क़यामत बरस रही है

तेरी मौजूदगी का.. सदा मुझे एहसास रहता है
बंद आँखों के आईने में तेरी सूरत देख लेता हूँ.

जरा अपने इस चेहरे से जरा नकाब हटा दे यारा
जरा देखें तेरे चेहरे पे क्या क़यामत बरस रही है.

जब भी तू आइने में अपना चेहरा देखती होगी
आइना अक्सर तुझे मेरा चेहरा दिखलाता होगा.

जो चेहरा मैंने अपने ख्यालो में दिल से देखा था
जब रूबरू हुए तो वह चेहरा दिल से उतर गया.

इतना बेइंतिहा प्यार इस चेहरे से न तू न कर
सारी उम्र फ़िर जिया न जाए और न मरा जाए.

***
चिठ्ठा चर्चा "समयचक्र" में

9 टिप्‍पणियां:

विनय ने कहा…

वाह महेन्द्र जी क्या लिखा है, ग़ज़ब।

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गुलाबी कोंपलें
सरकारी नौकरियाँ

Udan Tashtari ने कहा…

जीने मरने पर बात आ गई..वाह!!

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

तेरी मौजूदगी का.. सदा मुझे एहसास रहता है
बंद आँखों के आईने में तेरी सूरत देख लेता हूँ.

जरा अपने इस चेहरे से जरा नकाब हटा दे यारा
जरा देखें तेरे चेहरे पे क्या क़यामत बरस रही है.
क्या ग़ज़ब है,

विनय ने कहा…

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vandana ने कहा…

waah waah

ज्ञानदत्त । GD Pandey ने कहा…

सुन्दर लिखा जी।

राज भाटिय़ा ने कहा…

अजी वाह क्या लिखा है मजा आ गया, बहुत सुंदर

shanno ने कहा…

निरंतर जी,
क्या कल्पना संजोकर लिखी है आपने यह ग़ज़ल. बहुत खूब!

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

mahendra ji
kya khoob likha hai ye gazal , wah ji wah

maza aa gaya padhkar

aapko shivraatri ki shubkaamnaayen ..

Maine bhi kuch likha hai @ www.poemsofvijay.blogspot.com par, pls padhiyenga aur apne comments ke dwara utsaah badhayen..