14.12.09

मेरी इन आँखों में बसे सारे ख्बाब तुम ले जाओ


मेरी इन आँखों में बसे सारे ख्बाब तुम ले जाओ
दिल में धड़कते सभी अरमां आकर तुम ले जाओ.
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मेरी दुनिया में तुमको लौट कर आना ही नहीं है
सारे ख़त लौटा दो आकर अपने जबाब ले जाओ.
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आखिर भरी दुनिया में दिल को बहलाने कहाँ जाये
उनसे मोहब्बत हो गई चाहने वाले दीवाने कहाँ जाए.
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9 टिप्‍पणियां:

महफूज़ अली ने कहा…

खूबसूरत शब्दों के साथ .....सुंदर रचना..........

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना । आभार ।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.

Suman ने कहा…

nice

Suman ने कहा…

nice

Suman ने कहा…

nice

निर्मला कपिला ने कहा…

मेरी दुनिया में तुमको लौट कर आना ही नहीं है
सारे ख़त लौटा दो आकर अपने जबाब ले जाओ.
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है शुभकामनायें

वन्दना ने कहा…

bahut sundar .

शरद कोकास ने कहा…

खूबसूरत कता कही है आपने ।